क़ुदरत के बच्चे
हेलो,
नंबर अजनबी था मगर आवाज़ मानूस। सारा के पोर-पोर में रची-बसी आवाज़, उसकी अपनी खोई हुई आवाज़, जिसकी तलाश में सारा का पल पल आज़ुर्दा था। ख़ुशी थी, ग़म था, कसक थी, ख़ौफ़ या झिजक... कुछ था जिसने यूं ख़ंजर घोंपा कि सिसकी आह में बदल गई।
"How are you."
वही