सय्यद सिब्ते हसन के लेख
तहज़ीब की तारीफ़
हर क़ौम की एक तहज़ीबी शख़्सियत होती है। इस शख़्सियत के कुछ पहलू दूसरी तहज़ीबों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन कुछ ऐसी अपनी अलग विशेषताएँ होती हैं जो एक क़ौम की तहज़ीब को दूसरी तहज़ीबों से अलग और विशिष्ट करती हैं। हर क़ौमी तहज़ीब अपनी इन्हीं अलग विशेषताओं
फोर्ट विलियम कॉलेज
फोर्ट विलियम कॉलेज पाक-ओ-हिंद की धरती पर पश्चिमी तर्ज़ का पहला शिक्षण संस्थान था जो गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेज़ली (1798-1805 ई.) के आदेश से 1800 ई. में कलकत्ता में स्थापित हुआ। कॉलेज क़ायम करने का फ़ैसला गवर्नर जनरल इन काउंसिल ने 10 जुलाई 1800 / 17 सफ़र
उर्दू रस्म-उल-ख़त की इस्लाह
उर्दू रस्म-उल-ख़त का सुधार सिब्ते हसन साहब का यह लेख दैनिक 'इमरोज़' ने दो किश्तों में अपने 6 और 7 जून 1955 ई. के अंकों में प्रकाशित किया (संपादक)। जनाब डॉक्टर मौलवी अब्दुल हक़ साहब का एक लेख उर्दू के रस्म-उल-ख़त (लिपि) के बारे में अख़बार 'इमरोज़'
तहज़ीब से तमद्दुन तक
तब अनु ने पवित्र स्थानों पर पाँच शहर बसाए और उनको नाम दिए और वहाँ इबादत के केंद्र क़ायम किए। उनमें पहला शहर एरिदू था। उसे पानी के देवता 'एनकी' के हवाले किया गया। निप्पुर की तख़्ती, महान बाढ़ हर तहज़ीब अपने तमद्दुन की पूर्वगामी होती है। तहज़ीब के
न. म. राशिद और तरक़्क़ी पसंदी
यह लेख मासिक पत्रिका 'पाकिस्तानी अदब' के अगस्त 1975 ई. के अंक में संपादकीय के तौर पर प्रकाशित हुआ था। इसके साथ ही न. म. राशिद का पत्र भी प्रकाशित हुआ था जिसके संदर्भ में यह संपादकीय लिखा गया था। यहाँ ये दोनों रचनाएँ पेश की जा रही हैं। (संपादक) जनाब