उवैस गिराच के शेर
सभी नज़ारे मिरी नज़र में ग़ुबार बन कर सिमट गए हैं
तुझे न आया नज़र तो शायद नज़र में तेरी असर नहीं है
-
टैग : निगाह
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड