याह्या ख़ान यूसुफ़ ज़ई के शेर
दश्त फिर क्यों नहीं रहे आबाद
अब्र आज़ाद है हवा महफ़ूज़
जो हवा की पनाह में आए
वही रह जाएगा दिया महफ़ूज़
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टैग : चराग़
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शह्र के शह्र को बीमार बना रखा है
आग लग जाए तिरे कार-ए-मसीहाई को
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