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ज़ीशान साहिल

1961 - 2008 | कराची, पाकिस्तान

प्रमुख उत्तर-आधुनिक शायर/अपनी नज़्मों के लिए मशहूर

प्रमुख उत्तर-आधुनिक शायर/अपनी नज़्मों के लिए मशहूर

ज़ीशान साहिल

ग़ज़ल 14

नज़्म 41

अशआर 13

मैं ज़िंदगी के सभी ग़म भुलाए बैठा हूँ

तुम्हारे इश्क़ से कितनी मुझे सहूलत है

किस क़दर महदूद कर देता है ग़म इंसान को

ख़त्म कर देता है हर उम्मीद हर इम्कान को

खिड़की के रस्ते से लाया करता हूँ

मैं बाहर की दुनिया ख़ाली कमरे में

गुज़र गई है मगर रोज़ याद आती है

वो एक शाम जिसे भूलने की हसरत है

कितने हैं लोग ख़ुद को जो खो कर उदास हैं

और कितने अपने-आप को पा कर भी ख़ुश नहीं

नस्री-नज़्म 93

पुस्तकें 9

 

चित्र शायरी 4

 

वीडियो 4

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