ज़िया शादानी के शेर
मैं उस को मौत से भी छीन लाता
वो जीने के लिए तय्यार कब था
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टैग : मौत
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अब इस से बढ़ के तरक़्क़ी का दौर क्या होगा
हरम में बैठ के ज़ाहिद शराब माँगे है
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