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कौसर मज़हरी (9)

1964   |   Delhi

परिचय: प्रोफेसर कौसर मजहरी (वास्तविक नाम: मुहम्मद एहसानुल हक़) एक प्रतिष्ठित साहित्यकार, शोधकर्ता और आलोचक हैं। उनका जन्म 5 अगस्त 1964 को चंदन बारा (ज़िला पूर्वी चंपारण, बिहार) के एक गाँव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गाँव के सरकारी विद्यालय से प्राप्त की और मौलाना आज़ाद हाई स्कूल, खैरावा से मैट्रिक किया। इसके बाद एम.एस. कॉलेज, मोतिहारी से 1984 में वनस्पति विज्ञान (ऑनर्स) तथा प्राणी विज्ञान और रसायन विज्ञान को सहायक विषय के रूप में लेकर स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

बचपन से ही उन्हें साहित्य में गहरी रुचि थी। उर्दू कविता के प्रति लगाव ने उन्हें भाषा और साहित्य की ओर आकर्षित किया। उन्होंने उर्दू में स्नातक तथा पटना विश्वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। बाद में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रोफेसर शमीम हनफ़ी के निर्देशन में पीएच.डी. पूरी की।

1997 में वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभाग से जुड़े और 1998 में स्थायी रूप से नियुक्त हुए। वर्तमान में वे प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उर्दू नज़्म और साहित्यिक आलोचना उनका विशेष क्षेत्र है।

उनकी प्रमुख कृतियों में जवाज़-ओ-इंतिख़ाब, जदीद नज़्म: हाली से मीराजी तक, जुरअत-ए-अफ़कार, बाज़दीद और तब्सरे, क़िराअत और मुक़ालमा, फ़ैज़ देहलवी, शैख़ मुहम्मद इब्राहीम ज़ौक़ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उपन्यास आँख जो सोचती है और काव्य-संग्रह माज़ी का आईना भी उल्लेखनीय हैं।

उनकी रचनाओं में बौद्धिक ईमानदारी, गंभीरता और सरल व प्रभावशाली शैली स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिसने उन्हें समकालीन उर्दू साहित्य में विशिष्ट स्थान दिलाया है।


संबंधी जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली (शिक्षा संस्थान)

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