पहचान: शोधकर्ता, आलोचक, अनुवादक, कवि और चिकित्सक
डॉ. तक़ी आबिदी उर्दू साहित्य की उन विशिष्ट हस्तियों में शामिल हैं जिन्होंने पेशे के रूप में चिकित्सा क्षेत्र में उच्च स्थान प्राप्त किया, लेकिन अपने शौक और रुचि के आधार पर उर्दू साहित्य की सेवा को जीवन का उद्देश्य बना लिया। वे एक साथ शोधकर्ता, आलोचक, अनुवादक, संपादक और कवि हैं, और अपनी बहुआयामी साहित्यिक सेवाओं के कारण समकालीन उर्दू जगत में एक सम्मानित स्थान रखते हैं।
सैयद तक़ी हसन आबिदी का जन्म 1 मार्च 1952 को दिल्ली में हुआ। उनका संबंध एक विद्वान और धार्मिक परिवार से है, जिसकी जड़ें उत्तर प्रदेश के अमरोहा के पास नौगांवां सादात में हैं। उनका वंश हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया से जुड़ता है। उनके पिता सैयद सिब्त नबी आबिदी एक शिक्षित व्यक्ति थे और पेशे से जज थे, जिनकी नौकरी के कारण परिवार दिल्ली से हैदराबाद चला गया।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा हैदराबाद में प्राप्त की। एमबीबीएस के बाद उन्होंने ब्रिटेन से एमएस, अमेरिका से एफसीएपी और कनाडा से एफआरसीपी की डिग्रियां प्राप्त कीं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ग्लासगो यूनिवर्सिटी से पैथोलॉजी में एमएससी किया और अमेरिकन बोर्ड ऑफ पैथोलॉजी के डिप्लोमेट भी हैं। वर्तमान में वे कनाडा के ओंटारियो में चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं।
यद्यपि वे पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन साहित्य उनकी व्यक्तित्व की मूल पहचान है। उर्दू, फ़ारसी और साहित्य से उनका गहरा लगाव बचपन से रहा है। ईरान में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने फ़ारसी भाषा पर विशेष अधिकार प्राप्त किया और फ़ारसी साहित्य का गहन अध्ययन किया। उनकी वैवाहिक जीवन भी ईरान से जुड़ा है, और उनकी पत्नी उनकी साहित्यिक गतिविधियों में सहयोग करती हैं।
डॉ. तक़ी आबिदी की साहित्यिक सेवाएं अत्यंत व्यापक और बहुआयामी हैं। वे लगभग 70 से अधिक पुस्तकों की रचना, संपादन, संकलन, विश्लेषण और अनुवाद कर चुके हैं। शोध और आलोचना में उन्हें विशेष दक्षता प्राप्त है और वे शास्त्रीय साहित्य के छिपे हुए पहलुओं को सामने लाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई उपेक्षित लेखकों और कवियों को सामने लाकर उन्हें उनका उचित स्थान दिलाया।
ग़ालिब, मीर अनीस, मिर्ज़ा दबीर, इंशा अल्लाह ख़ाँ इंशा, नज्म आफ़ंदी, फ़रीद लखनवी आदि पर उनका शोध अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से मीर अनीस और मिर्ज़ा दबीर पर उनका कार्य उर्दू साहित्य में अद्वितीय माना जाता है। उन्होंने मीर अनीस के मरसियों का वैज्ञानिक और भाषाई विश्लेषण प्रस्तुत कर आलोचना की एक नई दिशा दी। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ पर उनकी कृतियाँ "फ़ैज़ फ़हमी" और "फ़ैज़ शनासी" भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उनकी एक बड़ी उपलब्धि टोरंटो स्थित उनकी निजी लाइब्रेरी है, जिसमें उर्दू के दुर्लभ और मूल्यवान हस्तलिखित ग्रंथों का विशाल संग्रह है। उन्होंने इन अमूल्य धरोहरों को अपने व्यक्तिगत प्रयासों से संकलित किया और बाद में इसे एक कनाडाई विश्वविद्यालय को समर्पित कर दिया ताकि आने वाली पीढ़ियाँ लाभान्वित हो सकें।
उन्होंने अपनी पेशेवर आय को उर्दू साहित्य की सेवा में समर्पित किया, जो उनके गहरे प्रेम और समर्पण का प्रमाण है। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें विश्वभर की साहित्यिक संस्थाओं द्वारा अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। वे विभिन्न विश्वविद्यालयों में विज़िटिंग प्रोफेसर और फ़ेलो के रूप में भी जुड़े रहे हैं।
डॉ. तक़ी आबिदी का व्यक्तित्व ज्ञान, शोध, ईमानदारी और समर्पण का सुंदर संगम है। उन्होंने उर्दू साहित्य के दुर्लभ खजानों को सुरक्षित कर और गुमनाम साहित्य को सामने लाकर इसकी विरासत को और समृद्ध किया है۔