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पहचान: प्रमुख तज़किरा-निगार, लेखक एवं संकलक
इरफ़ान अब्बासी का जन्म 13 अगस्त 1924 को गढ़ी भलोल, जिला बाराबंकी के एक विद्वतापूर्ण परिवार में हुआ। उनके परदादा मौलाना अब्दुर्रज़्ज़ाक, दादा मौलाना अब्दुर्रहमान और पिता मौलाना नौमान दीनि उलूम के विद्वान थे, जबकि उनके पिता को शायरी और साहित्य का भी उत्तम रसास्वाद था और वे "सोज़" तख़ल्लुस करते थे। इसी शैक्षिक और साहित्यिक वातावरण ने इरफ़ान अब्बासी की व्यक्तित्व-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक शिक्षा मकतब में प्राप्त की और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा पूर्ण की। इसके साथ ही उन्होंने होम्योपैथी में डिप्लोमा भी किया। लगभग 1947 में उन्होंने उत्तर प्रदेश सिविल सचिवालय में नौकरी शुरू की और लंबी सरकारी सेवा के बाद 1984 में सेवानिवृत्त हुए।
इरफ़ान अब्बासी का मुख्य क्षेत्र तज़किरा-निगारी था, जिसमें उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उनकी सबसे महत्वपूर्ण कृति "तज़किरा शुअरा-ए उत्तर प्रदेश" है, जो कई खंडों में प्रकाशित एक महान शोध कार्य है। इसमें उन्होंने हजारों शायरों के जीवन-वृत्त और काव्य को संकलित किया, जो उर्दू साहित्य की अमूल्य धरोहर है।
उन्होंने अपने जीवन में लगभग 75 पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया, जिनमें प्रमुख हैं:
"आप", "आप थे", "आप हैं", "तज़किरा शुअरा-ए रेख़्ती", "दबिस्तान अमीर मीनाई", "नस्र निगारान उर्दू", "उर्दू अदब में कौन क्या?", "उर्दू शायरी में हिंदुस्तानियत", "इशारिया शुअरा-ए लखनऊ", "लखनऊ की अदबी व सांस्कृतिक अंजुमनें" आदि।
निधन: 4 जनवरी 2012 को उनका निधन हुआ।