लेखक : ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

प्रकाशक : मुर्तज़ा आदिल

प्रकाशन वर्ष : 1988

भाषा : Urdu

श्रेणियाँ : शाइरी

उप श्रेणियां : काव्य संग्रह

पृष्ठ : 153

सहयोगी : जामिया हमदर्द, देहली

aathwan aasman bhi neela hai

पुस्तक: परिचय

غلام محمد قاصر پاکستان سے تعلق رکھنے والے اردو کے ممتاز شاعر، ڈراما نگار، گیت نگار اور نقاد تھے۔ آپ کے تین شعری مجموعے "تسلسل" ،"آٹھواں آسماں بھی نیلا ہے" اور"دریائے گماں" منظر عام پر آئے۔ جنہوں نے سنجیدہ ادبی حلقوں میں بے پناہ پزیرائی حاصل کی اور قاصر کو جدید اردو غزل کے نمائندہ شعرا میں ایک منفرد مقام کا حامل قرار دیا گیا۔ "کلیاتِ قاصر" (اک شعر ابھی تک رہتا ہے ) کے عنوان سے 2009ء میں شائع ہو چکا ہے۔ زیر نظر کتاب "آٹھواں آسماں بھی نیلا ہے۔ غلام محمد قاصر کا دوسرا شعری مجموعہ ہے جو کہ 1988 میں منظر عام پر آیا ۔ اس مجموعہ میں ان کی لکھی ہوئی نظمیں اور غزلیں شامل ہیں۔

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लेखक: परिचय

ग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर 4 सितंबर 1941 को पहाड़पूर (डेरा इस्माईल ख़ाँ) में पैदा हुए। 1958 में मैट्रिक का इम्तिहान पास किया। पहले अपने तौर पर फ़ाज़िल-ए-उर्दू और फिर एम.ए. (उर्दू) के इम्तिहानात पास किए। मैट्रिक के बाद टीचर की हैसियत से मुलाज़िमत का आग़ाज़ किया। 1975 से गर्वनमैंट पोस्ट ग्रैजूएट कॉलेज मरदान में शोबा-ए-उर्दू से वाबस्ता रहे। 20 फ़रवरी 1999 को पेशावर में इंतिक़ाल कर गए। उनका मज्मूआ-ए-कलाम 'तसलसुल' के नाम से शाए हो गया है। उनकी दीगर तसानीफ़ के नाम ये हैं : 'दरिया-ए-गुमान', 'आठवाँ आसमान भी नीला है'। उन्हें सदारती एवार्ड बराए हुस्न-ए-कारकर्दगी से नवाज़ा गया।

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