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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

लेखक : अहसन मारहरवी

संस्करण संख्या : 001

प्रकाशक : मतबा दबदबा-ए-सिकन्दरी, रामपुर

मूल : रामपुर, भारत

प्रकाशन वर्ष : 1911

भाषा : Urdu

पृष्ठ : 99

सहयोगी : असलम महमूद

aghlat-e-naguzir 1329 hijri
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लेखक: परिचय

अहसन मारहरवी, सय्यद अ’ली अहसन (1876-1940)‘दाग़’ देहलवी के शागिर्द थे और कई साल हैदराबाद में उस्ताद के साथ गुज़ारे। उ’म्र के आख़िरी बरसों के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उर्दू के उस्ताद रहे। मुशाएरों में गलेबाज़ी के बढ़ते चलन से नाराज़ रहते थे।

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