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पहचान: महान मुहद्दिस, क़ुरआन के मफ़स्सिर, फ़क़ीह, मुजद्दिद-ए-मिल्लत और उपमहाद्वीप के प्रतिष्ठित इस्लामी चिंतक
शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी उपमहाद्वीप के उन महान इस्लामी विद्वानों में से हैं जिन्होंने पतनशील मुस्लिम समाज में क़ुरआन, हदीस और फ़िक़्ह की बुनियाद पर धार्मिक और बौद्धिक पुनर्जागरण की एक सशक्त आंदोलन की नींव रखी। उन्हें “हकीमुल उम्मत” और “मुजद्दिद-ए-मिल्लत” जैसे सम्मानजनक उपाधियों से याद किया जाता है।
आपका जन्म शव्वाल 1114 हिजरी, फ़रवरी 1703 ईस्वी में मौज़ा फुलत, ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर (भारत) में हुआ। आपके पिता शाह अब्दुर्रहीम एक महान आलिम, सूफ़ी, फ़तावा-ए-आलमगीरी के सहायक और मदरसा रहिमिया के संस्थापक थे। शाह वलीउल्लाह की प्रारंभिक शिक्षा और प्रशिक्षण अपने पिता की निगरानी में हुआ। कम आयु में ही आपने क़ुरआन, हदीस, फ़िक़्ह, मंतिक़ और अरबी–फ़ारसी علوم में महारत हासिल कर ली और युवावस्था में ही शिक्षण कार्य संभाल लिया।
पिता की मृत्यु के बाद सत्रह वर्ष की आयु में आपने मदरसा रहिमिया की शिक्षण गद्दी संभाली और बारह वर्षों तक दीन और अक़ली علوم की शिक्षा देते रहे। आपका जीवन अनुशासन, परिश्रम, इबादत, लेखन और उम्मत की सुधार का व्यावहारिक नमूना था।
शाह वलीउल्लाह का सबसे बड़ा कारनामा क़ुरआन मजीद की समझ और प्रचार है। आपने आम लोगों के लिए क़ुरआन का फ़ारसी अनुवाद “फ़त्हुर्रहमान” के नाम से किया। क़ुरआनी علوم पर आपकी प्रसिद्ध पुस्तक अल-फ़ौज़ुल-कबीर फ़ी उसूल-ए-तफ़्सीर आज भी एक मूल स्रोत मानी जाती है।
हदीस, फ़िक़्ह और तसव्वुफ़ में आपने संतुलन और शोध का मार्ग अपनाया। जड़ता भरी तक़लीद के बजाय क़ुरआन व सुन्नत की रोशनी में फ़िक़्ही मतों का तुलनात्मक अध्ययन किया और जिस मत को सुन्नत के अधिक निकट पाया, उसे अपनाया। आपकी पुस्तक हुज्जतुल्लाह अल-बालिग़ा इस्लामी चिंतन के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी आप अपने युग के सच्चे विश्लेषक थे। आपने मुसलमानों के पतन, आर्थिक असमानता और बौद्धिक गिरावट का गहराई से अध्ययन किया और क़ुरआन आधारित जीवन प्रणाली प्रस्तुत की।
आपके चार पुत्र—शाह अब्दुल अज़ीज़, शाह रफ़ीउद्दीन, शाह अब्दुल क़ादिर और शाह अब्दुल ग़नी—अपने समय के प्रतिष्ठित विद्वान बने और आपकी वैज्ञानिक व धार्मिक आंदोलन को आगे बढ़ाया।
निधन: शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी का निधन 29 मुहर्रम 1176 हिजरी / 20 अगस्त 1762 ईस्वी को दिल्ली में हुआ और आपको मेहंदियान, क़ब्रिस्तान-ए-मुहद्दिसीन में दफ़्न किया गया।