aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह दिश के अफ़सानों, मज़ामीन और रेडियो टॉक्स का मजमूआ है। मुसन्निफ़ अपनी किताब के नाम 'बेगम' की वजह-ए-तस्मिया बयान करता है, जो उसकी एक कहानी पर उसकी रफ़ीक़ा हयात के रद्दमल से मुतास्सिर होकर रखा गया। किताब में ज़ाती तजरबात, मुशाहिदात और रेडियो पर नशर होने वाली गुफ़्तगू शामिल हैं।