aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
जावेद नेहाल हाशमी समकालीन उर्दू के प्रमुख कथाकार, व्यंग्यकार, नाटककार और साहित्यिक आयोजक हैं। उन्होंने कहानी, व्यंग्य, नाटक और निबंध के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय मनोविज्ञान और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का संवेदनशील चित्रण मिलता है।
उनका जन्म 17 मार्च 1967 को पश्चिम बंगाल के कांकीनारा में हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्राणी-विज्ञान में स्नातक (ऑनर्स) तथा बाद में अंग्रेज़ी, शिक्षा और सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्राप्त की। अध्यापन के साथ-साथ वे साहित्य-सृजन और साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। उनका कहानी-संग्रह "दीवार" उनकी उल्लेखनीय कृतियों में शामिल है।