aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिचय: अहमद जमाल पाशा उर्दू के प्रसिद्ध निबंधकार, पत्रकार और संवेदनशील लेखक थे। उन्होंने व्यंग्य और हास्य को गंभीर सोच और सामाजिक समझ के साथ प्रस्तुत किया। वे साधारण विषयों को नए और अलग अंदाज़ में लिखने में माहिर थे।
उनका वास्तविक नाम आगा मोहम्मद नज़हत पाशा था। उनका जन्म 1 जून 1929 को इलाहाबाद के खुल्दाबाद मोहल्ले में हुआ। उन्होंने 1950 में मैट्रिक, 1953 में इंटरमीडिएट और 1959 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बी.ए. किया। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से 1961 में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद वे लखनऊ लौट आए और पत्रकारिता से जुड़ गए। पत्रकारिता के अनुभव से उनकी सोच और लेखन में गहराई आई। उनके निबंध समाज, जीवन की समस्याओं और साहित्य की स्थिति पर आधारित होते थे।
उनके लेखन में तीखा व्यंग्य और मधुर हास्य दोनों मिलते हैं। वे हल्के और बेकार मज़ाक के खिलाफ थे। उनका मानना था कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि लोगों को सोचने पर मजबूर करना है।
उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं: अंदेशा-ए-शहर, सितम इजाद, लज़्ज़त-ए-आजाद, मज़ामीन-ए-पाशा, चश्मा-ए-हैराँ, आसार-ए-क़यामत और फ़न-ए-लतीफ़ा-गोई। उनके प्रसिद्ध लेखों में अदब में मार्शल लॉ, हिजरत, शोर, बे-तरतीबी आदि शामिल हैं।
उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक समस्याओं पर खुलकर लिखा और सुधार की कोशिश की। 1970 के दशक में उनकी रचनात्मक शक्ति अपने चरम पर थी।
निधन: 27 सितंबर 1987 को पटना में एक रेडियो कार्यक्रम के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 28 सितंबर को उनका निधन हो गया। उन्हें 29 सितंबर 1987 को सिवान में दफनाया गया।