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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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लेखक : इफ़्तिख़ार नसीम

संस्करण संख्या : 1

प्रकाशक : अंजुम सलीमी, नज़र जावेद

मूल : फ़ैसलाबाद, पाकिस्तान

प्रकाशन वर्ष : 1994

भाषा : Urdu

श्रेणियाँ : शाइरी

उप श्रेणियां : काव्य संग्रह

पृष्ठ : 150

सहयोगी : रामपुर रज़ा लाइब्रेरी,रामपुर

nirman
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लेखक: परिचय

इफ़्तेख़ार नसीम 15 सितम्बर 1946 को फैसलाबाद में पैदा हुए. उनके पिता ख़लीक़ क़ुरैशी प्रसिद्ध पत्रकार थे और दैनिक ‘अवाम’ के मालिक-सम्पादक थे. इफ़्तेख़ार नसीम 1971 में देश छोड़कर अमेरिका चले गये. अमेरिका में उन्होंने समलैंगिकों के अधिकार के लिए व्यावहारिक संघर्ष किया. इफ़्तेख़ार नसीम की गिनती शिकागो में पाकिस्तानी समुदाय के लोकप्रिय और सक्रीय  व्यक्तियों में होती थी. उन्होंने संगत रेडियो के नाम से एक ऍफ़.एम. चैनल भी स्थपित किया था.
इफ़्तेख़ार नसीम के इस नये और बदले हुए ज़ेहन का असर उनकी शाइरी  में साफ़ नज़र आता है. उनकी ग़ज़लें नई ज़िन्दगी और नये मसाइल से पैदा होनेवाले एहसास से परिपूर्ण हैं. इफ़्तेख़ार नसीम के काव्य संग्रह ‘ग़ज़ाल’ ‘मुख़्तलिफ़’ ‘ एक थी लड़की’ और ‘आबदोज़’ के नाम से प्रकाशित हुए. अफ़सानों का मजमुआ ‘शबरी’ के नाम से छपा. अख़बारों में उनके कालम भी बहुत दिलचस्पी से पढ़े जाते थे.
22 जुलाई 2011 को शिकागो में देहांत हुआ.

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