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शायर जमाली का असल नाम सैयद नज़रुलहसनैन था। उनके पिता का नाम सैयद शौकत अली और माता का नाम हामिदा बेग़म था। उनका जन्म 15 जून 1943 को बहराइच के साहित्यिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मोहल्ले काज़ीपुरा में हुआ। उन्होंने एम.ए. (उर्दू) तक की शिक्षा प्राप्त की। बाद में स्वास्थ्य विभाग, जौनपुर में हेल्थ सुपरवाइज़र के पद पर नियुक्त हुए और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। शायर जमाली के जीवन का अधिकांश समय जौनपुर में गुज़रा, उनके माता-पिता और भाई आदि बाद में बहराइच से नानपारा चले गए और वहीं बस गए। इसी वजह से शायर जमाली अक्सर नानपारा आया करते थे और शायर शारिक़ रब्बानी के मकान के पास स्थित अपने माता-पिता के आवास पर ठहरते थे।
शायर जमाली ने भारत में आयोजित होने वाले ऑल इंडिया मुशायरों में भाग लेने के अलावा विदेशों में आयोजित मुशायरों में भी शिरकत की। उन्होंने दोहा (क़तर), दुबई, अबू धाबी आदि में आयोजित मुशायरों में हिस्सा लेकर अपनी शायरी को व्यापक श्रोताओं तक पहुँचाया और काफ़ी शोहरत हासिल की। शायर और साहित्यकार शारिक़ रब्बानी के अनुसार, शायर जमाली बेहतरीन ग़ज़लें कहते थे और उर्दू साहित्य की एक बेमिसाल शख़्सियत थे। शायर जमाली के तीन काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए: (1) कर्ब, (2) सहीफ़ा, (3) लहजा। उन्हें अपने काव्य-संग्रह ‘लहजा’ पर उर्दू अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें ‘पूर्वांचल रत्न सम्मान’, ‘नज़ीर बनारसी अवॉर्ड’ और ‘ऑल इंडिया कामिल अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया गया।
शायर जमाली के अपने दौर के अनेक प्रसिद्ध शायरों और साहित्यकारों से साहित्यिक और व्यक्तिगत संबंध रहे। राहत इंदौरी, बशीर बद्र, अनवर जलालपुरी, इज़हार वारसी, असर बहराइची, मेराज फ़ैज़ाबादी, अहमद निसार, असलम इलाहाबादी, आलम ग़ाज़ीपुरी और शारिक़ रब्बानी आदि से उनके घनिष्ठ संबंध थे। शायर जमाली का निधन 8 अक्टूबर 2008 को उस समय हुआ, जब वे एक ऑल इंडिया मुशायरे में शिरकत करने के लिए जा रहे थे। फ़ैज़ाबाद रेलवे स्टेशन पर उनका निधन हुआ और उन्हें नानपारा में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी साहित्यिक हस्तियों ने भाग लिया।
शायर जमाली की शायरी में मानवीय भावनाओं, सामाजिक परिस्थितियों, राजनीतिक एवं सामाजिक चेतना, जीवन के अनुभवों और समकालीन समस्याओं के विभिन्न पहलू प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनकी ग़ज़लों में सरल और प्रभावशाली अभिव्यक्ति के साथ गहरी सामाजिक चेतना भी दिखाई देती है। उनके कलाम में व्यक्ति के आंतरिक संसार, समाज की विसंगतियों, अत्याचार और दमन, युद्ध, मानवीय मूल्यों तथा बदलते हुए समय की समस्याओं को प्रभावशाली काव्यात्मक अभिव्यक्ति मिली है।