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jis ke hote hue hote the zamāne mere
“संदली-नामा” दास्तान-ए-अमीर हमज़ा का छठा दफ़्तर है, जिसको मुहम्मद इस्माईल असर ने उर्दू में तहरीर किया। यह दास्तान 1927 में नवल किशोर द्वारा प्रकाशित हुई। दास्तान-ए-अमीर हमज़ा एक ऐसी दास्तान है जिसका न केवल भारत में बल्कि पूरे उपमहाद्वीप में प्रमुख स्थान है। ये कहानियाँ इंडो-फ़ारसी से उर्दू में आईं और इनकी लोकप्रियता बढ़ती गई। सत्रहवीं शताब्दी के अंत में, कहानी कहने की परंपरा ने ख़ास लोगों के साथ साथ आम लोगों के बीच भी काफी लोकप्रियता हासिल की थी। लखनऊ के मुंशी नवल किशोर प्रेस ने अपने युग के विश्वसनीय कहानीकारों को अमीर हमज़ा की कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप उसे काफी लोकप्रियता मिली, और दास्तान-ए-अमीर हमज़ा के कई संस्करण प्रकाशित हुए। यहां तक कि नवल किशोर से इसके 46 खंड प्रकाशित हुए जो काफी मोटे थे। दास्तान-ए-अमीर हमज़ा का पूरा संग्रह रेख्ता ई-बुक्स पर उपलब्ध है।
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