aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
जमाल अहसानी के कलाम पर मुश्तमिल उर्दू शायरी का मजमुआ।
जमाल एहसानी की गिनती नई ग़ज़ल के अहम शाइरों में होती है. उनकी पैदाइश 12 अप्रैल 1951 को सरगोधा में हुई. पैत्रिक स्थान पानीपत था.बी.ए. किया और जीवकोपार्जन में लग गये. एक अर्से तक सूचना एवं प्रसारण विभाग सिंध से सम्बद्ध रहे,इसके अलावा कई पत्रिकाओं का सम्पादन किया. उन्होंने ‘राज़दार के नाम से अपना एक परचा भी निकाला. 10 फ़रवरी 1998 में उनका देहांत हुआ. उनके काव्य संग्रह ‘सितारा-ए-सफ़र, ‘रात के जागे हुए, ‘तारे को महताब किया के नाम से प्रकाशित हुए.
जमाल एहसानी की शाइरी परम्परा के विरुद्ध और परम्परा से दूर भागती हुई आधुनिकतावादी शाइरी के बीच एक चीज़ है जो चौंकाती है और अपने कुछ लम्हों में हैरान करती है.