aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी, जिन्हें सुल्तान-उल-हिंद और ग़रीब नवाज़ के नाम से जाना जाता है, की हयात, ख़िदमात, तालीमात और रूहानी असरात पर मुश्तमिल मक़ालात का एक जामे' मजमूआ है। यह किताब तसव्वुफ़, इस्लामी तबलीग़ और हिंदुस्तान में सिलसिला चिश्तिया के पायेदार असर-ओ-रसूख़ में उनकी नुमायां ख़िदमात को बयान करती है। यह तसनीफ़ उनकी याद को ख़िराज-ए-अक़ीदत है और इसे दरअसल 'अहल-ए-सुन्नत की आवाज़' के ख़ुसूसी शुमारे से मुरत्तब किया गया है।