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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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रद करें डाउनलोड शेर

लेखक : ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

संस्करण संख्या : 001

प्रकाशक : मक्तबा फ़ुनून, लाहौर

प्रकाशन वर्ष : 1977

भाषा : Urdu

श्रेणियाँ : शाइरी

उप श्रेणियां : काव्य संग्रह

पृष्ठ : 144

सहयोगी : फ़रहत एहसास

tasalsul
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पुस्तक: परिचय

غلام محمد قاصر کا شمار اردو کے جدید شعراء میں کیا جاتا ہے۔ ان کی غزلوں میں روایت کا اثر نظر تو آتا ہے مگر اس کے ساتھ ساتھ ایک ایسی فضا بھی نظر آتی ہے جس میں ان کے حالات زندگی کی جھلک نظر آتی ہے۔ مذکورہ کتاب غلام محمد قاصر کا پہلا شعری مجموعہ ہے۔ جس میں کل ۵۵ غزلیں اور ۲۱ نظمیں شامل ہیں۔ ساتھ ہی کتاب کی شروعات میں ڈاکٹر سید عبداللہ، صوفی تبسم، احسان دانش، ظہیر کاشمیری، عارف عبدالمتین جیسے نامور ناقدین کے تاثرات شامل کیے گئے ہیں۔ ساتھ ہی "تسلسل کا شاعر" کے عنوان سے احمد ندیم قاسمی کا مضمون بھی شامل ہے۔ وہ لکھتے ہیں، "قاصر غزل کی سی قدیم صنف میں اظہار کرتا ہے مگر اس کے موضوعات، بات کہنے کے انداز، بیسویں صدی کو اپنے جلووں میں لے کر چلنے کے تیور ، تشکیک و تذبذب میں معلق عصر کی آنکھوں میں ڈال کر یقین و اعتماد کے ساتھ نغمہ گری، اپنی علاقائی اور پھر وطنی خصوصیات کو پورے کرّہ ارص سے مربوط کردینے کے حوصلے۔یہ سب قاصر کی منفرد پہچانیں ہیں۔"

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लेखक: परिचय

ग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर 4 सितंबर 1941 को पहाड़पूर (डेरा इस्माईल ख़ाँ) में पैदा हुए। 1958 में मैट्रिक का इम्तिहान पास किया। पहले अपने तौर पर फ़ाज़िल-ए-उर्दू और फिर एम.ए. (उर्दू) के इम्तिहानात पास किए। मैट्रिक के बाद टीचर की हैसियत से मुलाज़िमत का आग़ाज़ किया। 1975 से गर्वनमैंट पोस्ट ग्रैजूएट कॉलेज मरदान में शोबा-ए-उर्दू से वाबस्ता रहे। 20 फ़रवरी 1999 को पेशावर में इंतिक़ाल कर गए। उनका मज्मूआ-ए-कलाम 'तसलसुल' के नाम से शाए हो गया है। उनकी दीगर तसानीफ़ के नाम ये हैं : 'दरिया-ए-गुमान', 'आठवाँ आसमान भी नीला है'। उन्हें सदारती एवार्ड बराए हुस्न-ए-कारकर्दगी से नवाज़ा गया।

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