पुस्तकालय: परिचय
गवर्नमेंट उर्दू लाइब्रेरी, पटना बिहार का एक प्रमुख सरकारी पुस्तकालय है, जिसकी स्थापना 1938 में उर्दू भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से की गई थी। पिछले आठ दशकों से अधिक समय से यह संस्थान उर्दू की साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य उर्दू की दुर्लभ पुस्तकों और प्रकाशनों का संरक्षण, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और साहित्यप्रेमियों को उत्कृष्ट अध्ययन-सामग्री उपलब्ध कराना तथा उर्दू की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।
पुस्तकालय में 40,000 से अधिक पुस्तकों, पत्रिकाओं, शोध-पत्रों और संदर्भ ग्रंथों का समृद्ध संग्रह सुरक्षित है, जिसमें उर्दू शोध, आलोचना, कविता, कथा-साहित्य, इतिहास तथा अन्य साहित्यिक विषय शामिल हैं। यह पुस्तकालय शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और उर्दू साहित्य के पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र है। साथ ही यह ऐसा अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास करता है, जहाँ पाठक उर्दू भाषा की सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपरा से गहरा जुड़ाव स्थापित कर सकें।
इस पुस्तकालय के बहुमूल्य संग्रह का एक चयनित भाग अब रेख़्ता डिजिटल लाइब्रेरी पर भी उपलब्ध है, जहाँ विश्वभर के पाठक, विद्यार्थी और शोधकर्ता इस अमूल्य साहित्यिक धरोहर का लाभ उठा सकते हैं।