ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओ

जावेद कमाल रामपुरी

ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओ

जावेद कमाल रामपुरी

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    ढल चुकी रात मुलाक़ात कहाँ सो जाओ

    सो गया सारा जहाँ सारा जहाँ सो जाओ

    सो गए वहम-ओ-गुमाँ वहम-ओ-गुमाँ सो जाओ

    सो गया दर्द-ए-निहाँ दर्द-ए-निहाँ सो जाओ

    कब तलक दीदा-ए-नम दीदा-ए-नम दीदा-ए-नम

    कब तलक आह-ओ-फ़ुग़ाँ आह-ओ-फ़ुग़ाँ सो जाओ

    आह अब टूट चला टूट चला टूट चला

    आह ये रिश्ता-ए-जाँ रिश्ता-ए-जाँ सो जाओ

    उठ चले दिल के मकीं दिल के मकीं दिल के मकीं

    लुट गया सारा मकाँ सारा मकाँ सो जाओ

    स्रोत:

    • पुस्तक : Awaz Na Do (पृष्ठ 39)
    • रचनाकार : Javed Kamal
    • प्रकाशन : Sky Lark Publishers, Aligarah (1993)
    • संस्करण : 1993

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