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शाम-ए-ग़म की सहर न हो जाए

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

शाम-ए-ग़म की सहर न हो जाए

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

MORE BYशिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

    शाम-ए-ग़म की सहर हो जाए

    हर ख़ुशी मुख़्तसर हो जाए

    आह दिल पर असर हो जाए

    उन की भी आँख तर हो जाए

    राज़-ए-उल्फ़त सँभाल कर रखिए

    हर कोई बा-ख़बर हो जाए

    हिज्र में दिल का दिल-शिकन आलम

    जो इधर है उधर हो जाए

    ज़िक्र-ए-तकमील-ए-आरज़ू छेड़ो

    रात यूँही बसर हो जाए

    मुझ पे इतना करम फ़रमाओ

    मेरा ग़म मो'तबर हो जाए

    स्रोत :
    • पुस्तक : Barq-o-Sharar (पृष्ठ 43)
    • रचनाकार : Dr. Barq Poonchvi
    • प्रकाशन : Swaraj Publication (2005)
    • संस्करण : 2005

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