ग़ज़लें

नई नस्ल के प्रमुख नवोदित शायर/साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित

1988

प्रमुखतम प्रगतिशील शायरों में विख्यात/ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के समकालीन/अपनी गज़ल ‘मरने की दुआएँ क्यों माँगूँ.......’ के लिए प्रसिद्ध, जिसे कई गायकों ने स्वर दिए हैं

1912 -2005

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर। उनकी कुछ ग़ज़लें ' बाज़ार ' और ' गमन ' , जैसी फिल्मों से मशहूर

1908 -1969

प्रतिष्ठित शायर, अपने शेर " मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़सूस होते हैं " के लिए मशहूर

1900 -1956

प्रमुख आधुनिक शायर / पत्रिका तहरीक से संबंधित थे

1938 -2010

प्रमुख आलोचक / पत्रिका ‘शेर-ओ-हिक्मत’ के संपादक थे

1931 -2012

प्रसिद्ध फ़िल्म गीतकार जावेद अख़्तर के दादा

1865 -1927

ख़ुशनुमा तरन्नुम के लिए मशहूर

1920 -1975