नअत
1873 -1910
नयी नज़्म को विषयगत और शैली के लिहाज़ से समृद्ध करने में मुख्य भूमिका निभाई
1867 -1945
मशहूर उत्तर-क्लासिकी शाइर जो नवाब लोहारू से वाबस्ता थे। उनका नाम मिर्ज़ा ग़ालिब ने प्रस्तावित किया था और वह दाग़ देहलवी के दामाद थे