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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

जश्न-ए-आज़ादी

आज़ादी एक ऐसी नेमत है, जिसकी क़द्र उस वक़्त और भी बढ़ जाती है, जब उसे क़ुर्बानियों, जद्दोजहद और वतन से मोहब्बत के संदर्भ में देखा जाए। उर्दू शायरी में आज़ादी का तसव्वुर हमेशा एक अहम और ताक़तवर मौज़ू रहा है। इस चयन में ऐसे कलाम को पेश किया गया है, जिसमें आज़ादी की उमंग, वतन की मोहब्बत, शहीदों की क़ुर्बानी, ग़ुलामी से निजात और एक आज़ाद समाज के ख़्वाब को ख़ूबसूरत शायराना अंदाज़ में पेश किया गया है। यह चयन उन सभी पाठकों के लिए है, जो उर्दू शायरी में आज़ादी, देशभक्ति और हुर्रियत के जज़्बात को महसूस करना चाहते हैं।

जश्न-ए-आज़ादी

दिल जलाओ

असग़र अली तबस्सुम
बोलिए