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आग़ा निसार

आग़ा निसार

ग़ज़ल 1

 

अशआर 1

तिरे लबों को मिली है शगुफ़्तगी गुल की

हमारी आँख के हिस्से में झरने आए हैं

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI