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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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आजाद उम्मीदी

1924 - 1986

आजाद उम्मीदी

ग़ज़ल 1

 

अशआर 3

पुश्त पर मोहर-ए-नबूवत की ज़ियाओं वाले

कर दिया नूर-ए-हक़ीक़त को नुमायाँ तू ने

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मेरे अहबाब का किरदार समझता हूँ मैं

क्या करेंगे ये बुराई के सिवा मेरे बा'द

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संग-पारों ने नबुव्वत की गवाही दी है

बे-ज़बानों को बनाया है ज़बाँ-दाँ तू ने

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सलाम 1

 

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