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अब्बास दाना

पाकिस्तान

ग़ज़ल 16

शेर 10

उस से पूछो अज़ाब रस्तों का

जिस का साथी सफ़र में बिछड़ा है

अपने ही ख़ून से इस तरह अदावत मत कर

ज़िंदा रहना है तो साँसों से बग़ावत मत कर

तुम्हारा नाम लिया था कभी मोहब्बत से

मिठास उस की अभी तक मिरी ज़बान में है

ई-पुस्तक 1