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अब्बास दाना

पाकिस्तान

ग़ज़ल 16

शेर 10

उस से पूछो अज़ाब रस्तों का

जिस का साथी सफ़र में बिछड़ा है

अपने ही ख़ून से इस तरह अदावत मत कर

ज़िंदा रहना है तो साँसों से बग़ावत मत कर

है जिस्म सख़्त मगर दिल बहुत ही नाज़ुक है

कि जैसे आईना महफ़ूज़ इक चट्टान में है