अब्दुल्लाह ज़ाकिर के शेर
सलामत रहो तुम बुरा करने वालो
बुरा कर रहे हो भला हो रहा है
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दिल भी रखता हूँ कुछ तमन्ना भी
मुंतज़िर हूँ तिरे इशारों का
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क़यामत बपा है क़यामत बपा
जवाँ हो गए वो जवाँ हो गए
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हम एक थे कि लिए लुत्फ़ ग़ुंचा ओ गुल से
वो एक थे कि मज़े आशियाँ जला के लिए
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