ग़ज़ल 2

 

शेर 2

ये आज कौन सी तक़्सीर हो गई 'नामी'

कि दोस्त भी तो मिलाते नहीं नज़र हम से

दम के दम में दुनिया बदली भीड़ छटी कोहराम उठा

चलते चलते साँस रुकी और ख़त्म हुआ अफ़्साना भी

 

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