अहमद लतीफ़ के शेर
तुम्हारे नाम पे मैं जल-बुझा तो इल्म हुआ
कि सूद बनता है कैसे ज़ियाँ बनाते हुए
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क़दम कुछ ऐसा उठा आख़िरी क़दम कि 'लतीफ़'
मैं दो जहाँ से गया इक जहाँ बनाते हुए
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