Ahmad Shahryar's Photo'

अहमद शहरयार

1983 | ईरान

ईरान स्थित प्रसिद्ध पाकिस्तानी शायर

ईरान स्थित प्रसिद्ध पाकिस्तानी शायर

अहमद शहरयार

ग़ज़ल 14

शेर 15

सालगिरह पर कितनी नेक तमन्नाएँ मौसूल हुईं

लेकिन इन में एक मुबारकबाद अभी तक बाक़ी है

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दस्तकें सदा कौन दर पे आया है

फ़क़ीर-ए-शहर है या शहरयार देखिएगा

रातों को जागते हैं इसी वास्ते कि ख़्वाब

देखेगा बंद आँखें तो फिर लौट जाएगा

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फ़क़ीर-ए-शहर भी रहा हूँ 'शहरयार' भी मगर

जो इत्मिनान फ़क़्र में है ताज-ओ-तख़्त में नहीं

क़तरा ठीक है दरिया होने में नुक़सान बहुत है

देख तो कैसे डूब रहा है मेरा लश्कर मुझ में