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अकबर इलाहाबादी

1846 - 1921 | इलाहाबाद, भारत

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

उर्दू में हास्य-व्यंग के सबसे बड़े शायर , इलाहाबाद में सेशन जज थे।

कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी

आई होगी किसी को हिज्र में मौत

इश्वा भी है शोख़ी भी तबस्सुम भी हया भी

हर एक से सुना नया फ़साना हम ने

रहमान के फ़रिश्ते गो हैं बहुत मुक़द्दस

आई होगी किसी को हिज्र में मौत

इश्क़ नाज़ुक-मिज़ाज है बेहद

हुए इस क़दर मोहज़्ज़ब कभी घर का मुँह न देखा

जो कहा मैं ने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर