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अम्बरीन सलाहुद्दीन

पाकिस्तान

नई पीढ़ी की अहम शायरा, अपनी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध

नई पीढ़ी की अहम शायरा, अपनी नज़्मों के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 13

नज़्म 9

शेर 8

उलझती जाती हैं गिर्हें अधूरे लफ़्ज़ों की

हम अपनी बातों के सारे अगर मगर खोलें

तुम जो चाहो तो रुक भी सकता है

वर्ना किस से रुका है आधा दिन

मेरी हैरत मिरी वहशत का पता पूछती है

देखिए कौन किसे पहले रसाई देगा