अक़ील शाह के शेर
देखे न फ़क़ीरी को कोई शक से हमारी
दीवार में दर बनता है दस्तक से हमारी
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ज़वाल-ए-उम्र में का'बे की आरज़ू कैसी
'अक़ील' रात गए क्या किसी के घर जाना
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