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आरिफ़ जलाली

1928 - 2009

ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल

नशा शराब में होता तो नाचती बोतल

वहाँ ख़ाक अहद-ए-वफ़ा निभे वहाँ ख़ाक दिल का कँवल खिले

जहाँ ज़िंदगी की ज़रूरतों का भी हसरतों में शुमार है