अरसलान फ़ारिस के शेर
दिल-कशी मोहताज होती है निगाह-ए-नाज़ की
हुस्न क्या है देखने को ही अगर कोई न हो
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
अंदाज़-ए-तख़य्युल ही बदल जाता है मेरा
जब उन का तसव्वुर भी ज़रा पास से गुज़रे
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड