अशरफ़ यूसुफ़ी के शेर
लकीरें खींच के मिट्टी पे बैठ जाता हूँ
यहाँ मकाँ था ये बाज़ार ये गली उस की
-
टैग : नोस्टलजिया
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
एक तस्वीर हूँ ग़म की जिस पर
मुस्कुराने का गुमाँ होता है
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
हवा के लम्स में उस की महक भी होती है
वो शाख़-ए-गुल जो कहीं रू-ब-रू नहीं होती
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड