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आसिफ़ा ज़मानी

लखनऊ, भारत

शायरा और फ़ारसी अदब की विद्वान, लखनऊ विश्वविद्यालय के फ़ारसी विभाग की अध्यक्ष रहीं

शायरा और फ़ारसी अदब की विद्वान, लखनऊ विश्वविद्यालय के फ़ारसी विभाग की अध्यक्ष रहीं

ग़ज़ल

ऐ मिरे दिल बता ख़्वाब बुनता है क्यूँ

अज्ञात

किसी की साँस उखड़ती जा रही थी

अज्ञात

घर को कैसा भी तुम सजा रखना

अज्ञात

ज़िंदगी में तुझ को पाना आज तक भूला नहीं

अज्ञात

तुम से शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं

अज्ञात

तेरी यादों ने तड़पाया बहुत है

अज्ञात

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI