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अतीक़ अंज़र

1963 | क़तर

अतीक़ अंज़र के संपूर्ण

ग़ज़ल 15

शेर 15

बिछड़ते वक़्त अना दरमियान थी वर्ना

मनाना दोनों ने इक दूसरे को चाहा था

वो ग़ज़ल की किताब है प्यारे

उस को पढ़ना सवाब है प्यारे

दूर मुझ से रहते हैं सारे ग़म ज़माने के

तेरी याद की ख़ुश्बू दिल में जब ठहरती है

शाम के धुँदलकों में डूबता है यूँ सूरज

जैसे आरज़ू कोई मेरे दिल में मरती है

अश्क पलकों पे बिछड़ कर अपनी क़ीमत खो गया

ये सितारा क़ीमती था जब तलक टूटा था

पुस्तकें 2

Pahchan

 

1994

पहचान

 

2015

 

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
अतीक़ अंज़र

अतीक़ अंज़र

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अतीक़ अंज़र

अतीक़ अंज़र

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