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अज़रा परवीन

लखनऊ, भारत

प्रतिरोध और आधुनिक सामाजिक समस्याओं को अपनी शायरी में शामिल करनेवाली शायरा।

प्रतिरोध और आधुनिक सामाजिक समस्याओं को अपनी शायरी में शामिल करनेवाली शायरा।

ग़ज़ल

अब अपनी चीख़ भी क्या अपनी बे ज़बानी क्या

अज़रा नक़वी

आसमाँ साहिल समुंदर और मैं

अज़रा नक़वी

नज़्म

मैं और ही कोई हादिसा हूँ

अज़रा नक़वी

शरई सर्कस की गीदड़

अज़रा नक़वी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI