ग़ज़ल 11

शेर 25

मुझ को अख़बार सी लगती हैं तुम्हारी बातें

हर नए रोज़ नया फ़ित्ना बयाँ करती हैं

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मोहब्बत बाँटना सीखो मोहब्बत है अता रब की

मोहब्बत बाँटने वाले तवील-उल-उम्र होते हैं

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ये बातों में नर्मी ये तहज़ीब-ओ-आदाब

सभी कुछ मिला हम को उर्दू ज़बाँ से

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