डॉ. बुशरा रहमान का परिचय
मूल नाम : बुशरा ख़ातून सिद्दिक़ी
जन्म : 10 Jan 1940 | गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
पहचान: शोधकर्ता, आलोचक और उर्दू यात्रा-वृत्तांत (सफ़रनामा) पर महत्वपूर्ण शोध करने वाली लेखिका
डॉ. बुशरा रहमान का जन्म 10 जनवरी 1940 को गोरखपुर के एक शिक्षित और साहित्यिक परिवार में हुआ। उनके पिता हकीम अब्दुल कुद्दूस एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे, जबकि उनके बड़े भाई प्रोफेसर नजातुल्लाह सिद्दीकी विश्वप्रसिद्ध अर्थशास्त्री और इस्लामी विद्वान थे। घर के इसी विद्वतापूर्ण वातावरण ने बचपन से ही उनके व्यक्तित्व और अध्ययन-रुचि को आकार दिया।
प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई। बाद में उन्होंने अलीगढ़ से हाई स्कूल पास किया। 1960 में उनकी शादी मेजर सिद्दीकुर्रहमान से हुई। घरेलू जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा का सिलसिला जारी रखा और 1968 में बी.ए. ऑनर्स (उर्दू) तथा बाद में गोरखपुर विश्वविद्यालय से एम.ए. उर्दू की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद प्रोफेसर महमूद इलाही के निर्देशन में “उर्दू के गैर-मज़हबी सफ़रनामे” विषय पर शोधप्रबंध लिखकर 1986 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
डॉ. बुशरा रहमान की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षिक उपलब्धि उनकी शोधपरक पुस्तक “उर्दू के गैर-मज़हबी सफ़रनामे” है, जिसमें उन्होंने उर्दू यात्रा-वृत्तांत की परंपरा, उसके विकास और विभिन्न दौरों के सफ़रनामों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया। इस शोध के लिए उन्होंने सैकड़ों पुस्तकों का अध्ययन किया और उर्दू सफ़रनामे के साहित्यिक एवं कलात्मक पक्षों का गंभीर विश्लेषण किया।
उन्होंने मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की व्यक्तित्व, पत्रकारिता और वैचारिक सेवाओं पर भी महत्वपूर्ण शोधकार्य किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने मजनूँ गोरखपुरी के काव्य-साहित्य का संपादन किया तथा उनकी शख्सियत और साहित्यिक योगदान पर एक पुस्तक भी लिखी। उनकी रचनाओं में गंभीरता, शोधपरक दृष्टि और सुसंस्कृत भाषा-शैली स्पष्ट दिखाई देती है। उनके लेख “निगार”, “आजकल”, “नया दौर” और अन्य प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे।
निधन: डॉ. बुशरा रहमान का निधन 2009 में हुआ।