Farooq Banspari's Photo'

फ़ारूक़ बाँसपारी

1907 - 1968 | बलिया, भारत

ग़ज़ल 7

शेर 8

मिरे नाख़ुदा घबरा ये नज़र है अपनी अपनी

तिरे सामने है तूफ़ाँ मिरे सामने किनारा

यक़ीं मुझे भी है वो आएँगे ज़रूर मगर

वफ़ा करेगी कहाँ तक कि ज़िंदगी ही तो है

ग़म-ए-इश्क़ ही ने काटी ग़म-ए-इश्क़ की मुसीबत

इसी मौज ने डुबोया इसी मौज ने उभारा

ई-पुस्तक 1

Kulliyat-e-Farooq

 

1992

 

ऑडियो 7

कभी बे-नियाज़-ए-मख़्ज़न कभी दुश्मन-ए-किनारा

कोहसार का ख़ूगर है न पाबंद-ए-गुलिस्ताँ

ख़ुशी से फूलें न अहल-ए-सहरा अभी कहाँ से बहार आई

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI