गरिमा सक्सेना का परिचय
जन्म : 29 Jan 1990
गरिमा सक्सेना समकालीन हिंदी और उर्दू साहित्य की एक सक्रिय रचनाकार हैं। उनका जन्म 29 जनवरी 1990 को हुआ। उन्होंने बी. टेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन) में स्नातक शिक्षा प्राप्त की है।
गरिमा सक्सेना मुख्य रूप से दोहा, नवगीत, गीत और ग़ज़ल लिखती हैं। उनकी कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें ‘दिखते नहीं निशान’ (दोहा संग्रह), ‘है छिपा सूरज कहाँ पर’ (नवगीत संग्रह), ‘हरसिंगार झरे गीतों से’ (गीत संग्रह), ‘एक नई शुरुआत’ (दोहा संग्रह), ‘कोशिशों के पुल’ (नवगीत संग्रह), ‘चेहरे का जयपुर हो जाना’ (प्रेमगीत संग्रह), ‘बार-बार उग ही आएँगे’ (नवगीत संग्रह) और ‘रौशनी के पक्ष में’ (ग़ज़ल संग्रह) शामिल हैं।
संपादन के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। उन्होंने दोहे के सौ रंग (भाग 1 और 2), ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ और ‘समकालीन दोहा दशक’ जैसी पुस्तकों के साथ-साथ संवदिया पत्रिका के दोहा विशेषांक और नवोदित प्रवाह का अतिथि संपादन किया है।
उनकी रचनाएँ देश की कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने टीवी कार्यक्रमों और साहित्यिक मंचों पर काव्य-पाठ भी किया है। साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार, हिंदुस्तानी अकादमी का ‘युवा लेखन कविता सम्मान’, ‘नवगीत साहित्य सम्मान’ और ‘कविता शक्ति सम्मान’ सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
वो गीत, ग़ज़ल, दोहा, कविता और लघुकथा लिखती हैं। वर्तमान में वो स्वतंत्र लेखन के साथ कवर डिज़ाइनिंग और चित्रकारी से भी जुड़ी हुई हैं।