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हमीद नसीम

- 2000 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 8

शेर 4

याद की चुभन कोई कोई लौ मलाल की

मैं जाने कितनी दूर यूँही ख़ुद से बे-ख़बर गया

क्या ख़बर मेरा सफ़र है और कितनी दूर का

काग़ज़ी इक नाव हूँ और तेज़-रौ पानी में हूँ

देखते देखते तेरा चेहरा और इक चेहरा बन जाता है

इक मानूस मलूल सा चेहरा कब देखा था भूल गया हूँ

आसूदगी-आमोज़ हो जब आबला-पाई

हो जाती है मंज़िल की लगन दिल में तपाँ और

पुस्तकें 2

पाँच जदीद शायर

 

2012

 

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

हमीद नसीम

हमीद नसीम

अब मिरा दर्द न तेरा जादू

हमीद नसीम