Himayat Ali Shayar's Photo'

हिमायत अली शाएर

1926 - 2019 | टोरंटो, कनाडा

हिमायत अली शाएर के वीडियो

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

हिमायत अली शाएर

हिमायत अली शाएर

अन-कही

तुझ को मालूम नहीं तुझ को भला क्या मालूम हिमायत अली शाएर

अब बताओ जाएगी ज़िंदगी कहाँ यारो

हिमायत अली शाएर

आईना-दर-आईना

इस बार वो मिला तो अजब उस का रंग था हिमायत अली शाएर

उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना

हिमायत अली शाएर

कब तक रहूँ मैं ख़ौफ़-ज़दा अपने आप से

हिमायत अली शाएर

दस्तक हवा ने दी है ज़रा ग़ौर से सुनो

हिमायत अली शाएर

बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है

हिमायत अली शाएर

बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है

हिमायत अली शाएर

हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग

हिमायत अली शाएर

वीडियो का सेक्शन
शायरी वीडियो
An interview with Himayat Ali Shair--Voice of America

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अन्य वीडियो
उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना

उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना ग़ज़ाला रफ़ीक़

हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग

हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग नूर जहाँ

शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

  • हिमायत अली शाएर

  • हिमायत अली शाएर

  • अन-कही

    अन-कही हिमायत अली शाएर

  • अब बताओ जाएगी ज़िंदगी कहाँ यारो

    अब बताओ जाएगी ज़िंदगी कहाँ यारो हिमायत अली शाएर

  • आईना-दर-आईना

    आईना-दर-आईना हिमायत अली शाएर

  • उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना

    उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना हिमायत अली शाएर

  • कब तक रहूँ मैं ख़ौफ़-ज़दा अपने आप से

    कब तक रहूँ मैं ख़ौफ़-ज़दा अपने आप से हिमायत अली शाएर

  • दस्तक हवा ने दी है ज़रा ग़ौर से सुनो

    दस्तक हवा ने दी है ज़रा ग़ौर से सुनो हिमायत अली शाएर

  • बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है

    बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है हिमायत अली शाएर

  • बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है

    बदन पे पैरहन-ए-ख़ाक के सिवा क्या है हिमायत अली शाएर

  • हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग

    हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग हिमायत अली शाएर

शायरी वीडियो

  • An interview with Himayat Ali Shair--Voice of America

    An interview with Himayat Ali Shair--Voice of America

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  • उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना

    उस के ग़म को ग़म-ए-हस्ती तू मिरे दिल न बना ग़ज़ाला रफ़ीक़

  • हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग

    हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग नूर जहाँ