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होश तिर्मिज़ी

ग़ज़ल 11

शेर 5

दिल को ग़म रास है यूँ गुल को सबा हो जैसे

अब तो ये दर्द की सूरत ही दवा हो जैसे

दश्त-ए-वफ़ा में जल के रह जाएँ अपने दिल

वो धूप है कि रंग हैं काले पड़े हुए

मिलने को है खमोशी-ए-अहल-ए-जुनूँ की दाद

उठने को है ज़मीं से धुआँ देखते रहो